रेपो रेट यथावत रखने के आरबीआई के फैसले का उद्योग जगत ने किया स्वागत, निवेश और विकास को मिलेगी मजबूती

0
rbi-logo-5-8-26-555

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा रेपो रेट को बिना किसी बदलाव के यथावत रखने के फैसले का उद्योग जगत और अर्थशास्त्रियों ने स्वागत किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से कारोबारी विश्वास मजबूत होगा, निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर को मजबूती मिलेगी।

एसोचैम ने फैसले को बताया सकारात्मक

एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) ने कहा कि नीतिगत ब्याज दरों में स्थिरता बनाए रखना व्यापार जगत के लिए सकारात्मक संकेत है। संगठन के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने कहा कि यह फैसला भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत व्यापक आर्थिक (मैक्रोइकोनॉमिक) बुनियादों में आरबीआई के विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इससे निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, आर्थिक विकास को गति मिलेगी और बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप नीति निर्माण में आवश्यक लचीलापन भी बना रहेगा।

उन्होंने कहा कि आरबीआई ने आर्थिक विकास, महंगाई पर नियंत्रण और वित्तीय स्थिरता के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाया है। एसोचैम ने आरबीआई द्वारा चालू वित्त वर्ष के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत किए जाने का भी स्वागत किया।

सतर्क लेकिन सकारात्मक रही मौद्रिक नीति

एमके ग्लोबल फाइनेंशियल सर्विसेज की मुख्य अर्थशास्त्री माधवी अरोड़ा ने आरबीआई की मौद्रिक नीति को “सतर्क लेकिन सकारात्मक” बताया। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया में जारी तनाव, वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों की सख्ती और अल नीनो से जुड़े संभावित जोखिमों को ध्यान में रखते हुए भी घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती और विदेशी निवेश प्रवाह के सकारात्मक संकेतों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है।

उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में महंगाई आरबीआई के अनुमान से कम रही है, लेकिन मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने भविष्य में अल नीनो से जुड़े जोखिमों को देखते हुए सतर्क रुख बनाए रखा है। आरबीआई का मानना है कि यदि निकट भविष्य में महंगाई बढ़ती है तो उसका मुख्य कारण आपूर्ति पक्ष से जुड़ी चुनौतियां होंगी।

आर्थिक वृद्धि मजबूत, लेकिन महंगाई पर नजर जरूरी

बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री डॉ. मदन सबनवीस ने कहा कि आरबीआई के फैसले को जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान में 10 आधार अंकों की बढ़ोतरी और महंगाई के अनुमान में 10 आधार अंकों की कमी का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि मजबूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रित महंगाई की स्थिति में नीतिगत दरों को यथावत रखना उचित निर्णय है।

हालांकि उन्होंने आगाह किया कि चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही और वित्त वर्ष 2027-28 की पहली तिमाही में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में वर्ष 2026 के अंत तक ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed