निवेशकों की सुरक्षा के लिए एनएसई का सख्त प्रस्ताव, ऑथराइज्ड पर्सन्स के लिए बढ़ेंगी निगरानी और जवाबदेही

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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने निवेशकों की सुरक्षा मजबूत करने, निगरानी व्यवस्था बेहतर बनाने और स्टॉक ब्रोकरों की जवाबदेही बढ़ाने के लिए ऑथराइज्ड पर्सन्स (एपी) के लिए कड़े नियामकीय ढांचे का प्रस्ताव रखा है। यह प्रस्ताव भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के परामर्श से स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए परामर्श पत्र के माध्यम से जारी किया गया है। प्रस्ताव पर आम लोगों और संबंधित पक्षों से 27 तारीख तक सुझाव मांगे गए हैं।

एपी के लिए न्यूनतम नेटवर्थ की शर्त

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत व्यक्तिगत ऑथराइज्ड पर्सन्स के लिए कम से कम 5 लाख रुपये की नेटवर्थ रखना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है। वहीं, साझेदारी फर्म, एलएलपी और कंपनियों जैसे निकायों के लिए न्यूनतम नेटवर्थ 25 लाख रुपये निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा गया है।

बैंक और डीमैट खातों की जानकारी देनी होगी

प्रस्ताव में ऑथराइज्ड पर्सन्स के लिए अपने सभी बैंक खातों और डीमैट खातों की जानकारी साझा करना अनिवार्य करने की बात कही गई है। इसके अलावा कारोबार से संबंधित वेबसाइट और सोशल मीडिया खातों का विवरण भी उपलब्ध कराना होगा।

निवेशकों की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए ट्रेडिंग टर्मिनलों पर तकनीक आधारित सुरक्षा उपाय लागू करने का प्रस्ताव है। इनमें जियो-टैगिंग, सीसीटीवी निगरानी और बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण जैसे उपाय शामिल हैं।

स्टॉक ब्रोकरों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

प्रस्तावित नियमों के तहत ऑथराइज्ड पर्सन्स के कार्यों के लिए संबंधित स्टॉक ब्रोकरों को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। ब्रोकरों को अपने ऑथराइज्ड पर्सन्स की नियमित जांच के साथ-साथ अचानक ऑडिट और निगरानी की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।

एनएसई का कहना है कि प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य निवेशकों के हितों की बेहतर सुरक्षा करना, बाजार में पारदर्शिता बढ़ाना और ऑथराइज्ड पर्सन्स की गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित करना है।

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